Aindram Musical

Ancient Inspiration. Modern Expression

Indrasya Pārśve Abhigamyase | इन्द्रस्य पार्श्वेऽभि गम्यसे

(inspired from इन्द्र-मरुत्सूक्तम्)

युञ्जन्ति दीप्तमरुषं चरन्तम्
परितस्तस्थुर्भुवनानि सर्वे ।
रोचन्ति दिव्या रोचनाः समन्तात्
द्यौः प्रकाशैर्भुवनानि विभाति ॥

युञ्जन्ति हरी तव काम्यौ रथे
उभौ विपक्षे शोणौ धृष्णू रथे ।
नृवाहसा तौ बलिनौ वहन्तौ
इन्द्रं वहन्तौ बलिनौ जवेन ॥

केतुं कृण्वन्नकेतवे प्रकाशम्
पेशो हि मर्याः कृण्वन्नपेशसे ।
उषद्भिरुग्रः समजायथास्त्वम्
यत्राभवन्न प्रकाशो न रूपम् ॥

ततो स्वधामनु गर्भत्वमीरन्
पुनर्बालत्वं परि संत्यजन्तः ।
दधाना नामानि यज्ञियानि
स्वधाभिरेते समजायमानाः ॥

त्वं चिदिन्द्रारुजद्भिर्मरुद्भिः
दृढानि भित्त्वा परमे गुहायाम् ।
अविन्द उस्राः निहिताः सुदीप्ताः
गावो हि गूढाः तमसि प्रकाशाः ॥

देवयन्तो मतिमच्छा विदन्ति
गिरो वहन्तो विदद्वसुं स्तुवन्ति ।
महान्तमेनं श्रुतमीड्यमानं
मघवन्तं वीरममर्त्यमिन्द्रम् ॥

इन्द्रस्य पार्श्वेऽभि गम्यसे त्वम्
अबिभ्युषा वीर सहर्षमिन्द्र ।
मन्दू समेतौ समानवर्चाः
दृश्येथां देवावुभौ प्रहृष्टौ ॥

अनवद्यैस्ते प्रियगणैरिन्द्र
मरुद्भिरुग्रैर्दिवमभ्ययद्भिः ।
मखः सहस्वान् स्वयमर्चतीव
यजमानो घोषमुदीरयद् धि ॥

अतः परिज्मन्निह नोऽभिगच्छ
दिवो वा ज्योतिर्निचराद् विहाय ।
अस्माकमेताः प्रणयन्ति वाचः
गिरो हि सर्वाः त्वमभ्ययन्ति ॥

इतो वयं सातिमिन्द्र प्र यच्छ
दिवो वा भूमेरुत वा रजसः ।
महो नभसः पार्थिवस्योपरिष्टात्
त्वामेव वीरं शरणं वयं हि ॥

Meaning And Word forms

इन्द्र-मरुत्सूक्तम्

युञ्जन्ति दीप्तमरुषं चरन्तम्

परितस्तस्थुर्भुवनानि सर्वे ।

रोचन्ति दिव्या रोचनाः समन्तात्

द्यौः प्रकाशैर्भुवनानि विभाति ॥

Word Forms

 युञ्जन्ति — √युज्, लट्, परस्मैपद, प्रथमपुरुष बहुवचन — वे जुतते हैं, harness करते हैं

 दीप्तम् — √दीप्, क्त-प्रत्यय, द्वितीया एकवचन पुल्लिङ्ग — दीप्त, प्रकाशमान

 अरुषम् — अरुष, द्वितीया एकवचन पुल्लिङ्ग — अरुण, रक्तवर्ण, दीप्त

 चरन्तम् — √चर्, वर्तमान कृदन्त, द्वितीया एकवचन पुल्लिङ्ग — गतिशील, चलता हुआ

 परितः — अव्यय — चारों ओर, सर्वतः

 तस्थुः — √स्था, लिट्, प्रथमपुरुष बहुवचन — वे खड़े हुए, स्थित हुए

 भुवनानि — भुवन, प्रथमा बहुवचन नपुंसकलिङ्ग — लोक, जगत्, भुवन

 सर्वे — सर्व, प्रथमा बहुवचन — सभी

 रोचन्ति — √रुच्, लट्, प्रथमपुरुष बहुवचन — चमकते हैं, प्रकाशित होते हैं

 दिव्याः — दिव्य, प्रथमा बहुवचन स्त्रीलिङ्ग — दिव्य, स्वर्गीय

 रोचनाः — रोचन, प्रथमा बहुवचन स्त्रीलिङ्ग — प्रकाशमान प्रदेश, ज्योतियाँ

 समन्तात् — अव्यय — चारों ओर से, सर्वतः

 द्यौः — द्यौस्, प्रथमा एकवचन स्त्रीलिङ्ग — द्युलोक, आकाश, स्वर्ग

 प्रकाशैः — प्रकाश, तृतीया बहुवचन — प्रकाशों से, ज्योतियों से

 भुवनानि — भुवन, प्रथमा बहुवचन नपुंसकलिङ्ग — भुवन, लोक

 विभाति — √भा, लट्, प्रथमपुरुष एकवचन — प्रकाशित होता है, चमकता है

Literal Meaning

“They harness the radiant, ruddy, moving one; all the worlds stand around. The heavenly lights shine on every side; Heaven illumines the worlds with radiance.”


युञ्जन्ति हरी तव काम्यौ रथे

उभौ विपक्षे शोणौ धृष्णू रथे ।

नृवाहसा तौ बलिनौ वहन्तौ

इन्द्रं वहन्तौ बलिनौ जवेन ॥

Word Forms

 युञ्जन्ति — √युज्, लट्, परस्मैपद, प्रथमपुरुष बहुवचन — वे जुतते हैं, harness करते हैं

 हरी — हरि, द्विवचन — दो हरि-अश्व, दो दीप्तिमान/हरितवर्ण अश्व

 तव — त्वम्, षष्ठी एकवचन — तुम्हारे

 काम्यौ — काम्य, द्विवचन — इच्छित, प्रिय, वांछनीय दो

 रथे — रथ, सप्तमी एकवचन — रथ में, रथ पर

 उभौ — उभ, द्विवचन — दोनों

 विपक्षे — वि + पक्ष, सप्तमी एकवचन — दोनों पार्श्वों में, दोनों ओर

 शोणौ — शोण, द्विवचन — रक्तवर्ण, अरुण, ताम्रवर्ण दोनों

 धृष्णू — धृष्णु, द्विवचन — साहसी, उग्र, निर्भीक दोनों

 रथे — रथ, सप्तमी एकवचन — रथ में

 नृवाहसा — नृ + √वह्, द्विवचन-सम्बद्ध रूप — मनुष्यों/नायक को वहन करने वाले

 तौ — तत्, द्विवचन — वे दोनों

 बलिनौ — बलिन्, द्विवचन — शक्तिशाली दोनों

 वहन्तौ — √वह्, वर्तमान कृदन्त, द्विवचन — वहन करते हुए दोनों

 इन्द्रम् — इन्द्र, द्वितीया एकवचन — इन्द्र को

 वहन्तौ — √वह्, वर्तमान कृदन्त, द्विवचन — वहन करते हुए

 बलिनौ — बलिन्, द्विवचन — शक्तिशाली दोनों

 जवेन — जव, तृतीया एकवचन — वेग से, तीव्र गति से

Literal Meaning

“They harness your two beloved Haris to the chariot, both ruddy and bold, on its two sides. Those two powerful bearers carry Indra swiftly forward.”


केतुं कृण्वन्नकेतवे प्रकाशम्

पेशो हि मर्याः कृण्वन्नपेशसे ।

उषद्भिरुग्रः समजायथास्त्वम्

यत्राभवन्न प्रकाशो न रूपम् ॥

Word Forms

 केतुम् — केतु, द्वितीया एकवचन — संकेत, चिह्न, प्रकाश, प्रकट बोध

 कृण्वन् — √कृ, वर्तमान कृदन्त, प्रथमा एकवचन पुल्लिङ्ग — बनाते हुए, करते हुए

 अकेतवे — अ + केतु, चतुर्थी एकवचन — जिसके लिए केतु/प्रकाश नहीं था, अप्रकाशित के लिए

 प्रकाशम् — प्रकाश, द्वितीया एकवचन — प्रकाश, ज्योति

 पेशः — पेशस्, प्रथमा/द्वितीया एकवचन नपुंसकलिङ्ग — रूप, आकृति, अभिव्यक्ति

 हि — अव्यय — निश्चय ही, indeed

 मर्याः — मर्य, प्रथमा बहुवचन — वीर, पुरुष, शक्तिशाली जन

 कृण्वन् — √कृ, वर्तमान कृदन्त — बनाते हुए

 अपेशसे — अ + पेशस्, चतुर्थी एकवचन — अरूप के लिए, जिसके पास रूप नहीं

 उषद्भिः — उषस्, तृतीया बहुवचन — उषाओं के साथ, प्रभातों के साथ

 उग्रः — उग्र, प्रथमा एकवचन — प्रचण्ड, शक्तिशाली

 समजायथाः — सम् + √जन्, द्वितीयपुरुष एकवचन, आर्ष रूप — तुम उत्पन्न हुए, तुम प्रकट हुए

 त्वम् — सर्वनाम, प्रथमा एकवचन — तुम

 यत्र — अव्यय — जहाँ

 अभवन् — √भू, लङ्, प्रथमपुरुष बहुवचन — थे, विद्यमान थे

  — अव्यय — नहीं

 प्रकाशः — प्रकाश, प्रथमा एकवचन — प्रकाश

  — अव्यय — नहीं

 रूपम् — रूप, प्रथमा एकवचन नपुंसकलिङ्ग — रूप, आकृति

Literal Meaning

“Making light where there was no light, making form where there was no form, O heroes; you were born together with the Dawns, where there was neither light nor form.”


ततो स्वधामनु गर्भत्वमीरन्

पुनर्बालत्वं परि संत्यजन्तः ।

दधाना नामानि यज्ञियानि

स्वधाभिरेते समजायमानाः ॥

Word Forms

 ततः — ततः, अव्यय — thereafter, तत्पश्चात्

 स्वधाम् — स्वधा, द्वितीया एकवचन — अपनी स्वाभाविक शक्ति, अन्तर्निहित शक्ति

 अनु — अव्यय — अनुसार, अनुसरण करते हुए

 गर्भत्वम् — गर्भत्व, द्वितीया एकवचन नपुंसकलिङ्ग — गर्भावस्था, अजन्मी/अव्यक्त अवस्था

 ईरन् — √ईर्, आर्ष रूप, प्रथमपुरुष बहुवचन — उन्होंने आगे बढ़ाया/छोड़ा

 पुनः — अव्यय — फिर, पुनः

 बालत्वम् — बालत्व, द्वितीया एकवचन नपुंसकलिङ्ग — बाल-अवस्था, शैशव

 परि — अव्यय — पूर्णतः, चारों ओर

 संत्यजन्तः — सम् + √त्यज्, वर्तमान कृदन्त, प्रथमा बहुवचन — पूर्णतः त्यागते हुए

 दधाना — √धा, वर्तमान कृदन्त, प्रथमा बहुवचन — धारण करते हुए

 नामानि — नामन्, द्वितीया बहुवचन नपुंसकलिङ्ग — नाम, संज्ञाएँ

 यज्ञियानि — यज्ञिय, द्वितीया बहुवचन नपुंसकलिङ्ग — यज्ञ के योग्य, यज्ञ-संबंधी, पवित्र

 स्वधाभिः — स्वधा, तृतीया बहुवचन — अपनी-अपनी स्वाभाविक शक्तियों से

 एते — एतद्, प्रथमा बहुवचन — ये

 समजायमानाः — सम् + √जन्, वर्तमान कृदन्त, प्रथमा बहुवचन — उत्पन्न होते हुए, प्रकट होते हुए

Literal Meaning

“Thereafter, following their own inherent power, they passed beyond the embryonic state, completely casting off childhood; assuming sacrificial names, these came into manifestation through their own inherent powers.”


त्वं चिदिन्द्रारुजद्भिर्मरुद्भिः

दृढानि भित्त्वा परमे गुहायाम् ।

अविन्द उस्राः निहिताः सुदीप्ताः

गावो हि गूढाः तमसि प्रकाशाः ॥

Word Forms

 त्वम् — सर्वनाम, प्रथमा एकवचन — तुम

 चित् — अव्यय — भी, निश्चय ही, even

 इन्द्र — इन्द्र, सम्बोधन एकवचन — हे इन्द्र

 अरुजद्भिः — √रुज्, वर्तमान कृदन्त, तृतीया बहुवचन — तोड़ने वाले, विदीर्ण करने वाले

 मरुद्भिः — मरुत्, तृतीया बहुवचन — मरुतों के साथ

 दृढानि — दृढ, द्वितीया बहुवचन नपुंसकलिङ्ग — दृढ़ वस्तुएँ, मजबूत अवरोध

 भित्त्वा — √भिद्, तुमुन्/क्त्वा — भेदकर, तोड़कर

 परमे — परम, सप्तमी एकवचन — परम, गहनतम स्थान में

 गुहायाम् — गुहा, सप्तमी एकवचन — गुफा में, गुह्य स्थान में

 अविन्द — √विद्, लङ्/आर्ष रूप, द्वितीयपुरुष एकवचन — तुमने पाया, खोज निकाला

 उस्राः — उस्रा, द्वितीया बहुवचन स्त्रीलिङ्ग — उज्ज्वल किरणें, प्रकाशमान शक्तियाँ

 निहिताः — नि + √धा, क्त-प्रत्यय, द्वितीया बहुवचन स्त्रीलिङ्ग — छिपी हुई, रखी हुई

 सुदीप्ताः — सु + दीप्त, द्वितीया बहुवचन स्त्रीलिङ्ग — अत्यन्त दीप्त, अत्यन्त प्रकाशमान

 गावः — गो, प्रथमा बहुवचन स्त्रीलिङ्ग — गौएँ; रूपकतः प्रकाशमान शक्तियाँ/किरणें

 हि — अव्यय — निश्चय ही

 गूढाः — √गुह्, क्त-प्रत्यय, प्रथमा बहुवचन स्त्रीलिङ्ग — छिपी हुई

 तमसि — तमस्, सप्तमी एकवचन — अन्धकार में

 प्रकाशाः — प्रकाश, प्रथमा बहुवचन — प्रकाशमान, ज्योतिर्मय

Literal Meaning

“You, O Indra, with the Maruts, the breakers of what is firm, breaking through the strong barriers in the deepest cave, found the exceedingly radiant ones that had been hidden there; for the kine were concealed in darkness, radiant within concealment.”


देवयन्तो मतिमच्छा विदन्ति

गिरो वहन्तो विदद्वसुं स्तुवन्ति ।

महान्तमेनं श्रुतमीड्यमानं

मघवन्तं वीरममर्त्यमिन्द्रम् ॥

Word Forms

 देवयन्तः — देवयत्, प्रथमा बहुवचन — देवत्व की ओर उन्मुख, देवों की कामना करने वाले

 मतिम् — मति, द्वितीया एकवचन — बुद्धि, विचार, अन्तर्बोध

 अच्छा — अव्यय — की ओर, समीप

 विदन्ति — √विद्, लट्, प्रथमपुरुष बहुवचन — जानते हैं, प्राप्त करते हैं

 गिरः — गिर्, द्वितीया/प्रथमा बहुवचन स्त्रीलिङ्ग — वाणियाँ, स्तुतियाँ

 वहन्तः — √वह्, वर्तमान कृदन्त, प्रथमा बहुवचन — वहन करते हुए, ले जाते हुए

 विदद्वसुम् — विदद् + वसु, द्वितीया एकवचन — धन/सम्पदा पाने या देने वाला

 स्तुवन्ति — √स्तु, लट्, प्रथमपुरुष बहुवचन — स्तुति करते हैं

 महान्तम् — महत्, द्वितीया एकवचन — महान्

 एनम् — इदम्, द्वितीया एकवचन — इसको, इसे

 श्रुतम् — श्रुत, द्वितीया एकवचन — प्रसिद्ध, विख्यात

 ईड्यमानम् — √ईड्, वर्तमान कर्मणि कृदन्त, द्वितीया एकवचन — स्तुत किया जा रहा, प्रशंसित

 मघवन्तम् — मघवत्, द्वितीया एकवचन — दाता, समृद्ध, उदार

 वीरम् — वीर, द्वितीया एकवचन — वीर, शक्तिशाली

 अमर्त्यम् — अ + मर्त्य, द्वितीया एकवचन — अमर

 इन्द्रम् — इन्द्र, द्वितीया एकवचन — इन्द्र को

Literal Meaning

“Turning their thought toward the divine, they know and praise with their voices the wealth-finder, the great and renowned one, the praised, generous, heroic and immortal Indra.”


इन्द्रस्य पार्श्वेऽभि गम्यसे त्वम्

अबिभ्युषा वीर सहर्षमिन्द्र ।

मन्दू समेतौ समानवर्चाः

दृश्येथां देवावुभौ प्रहृष्टौ ॥

Word Forms

 इन्द्रस्य — इन्द्र, षष्ठी एकवचन — इन्द्र का, इन्द्र के

 पार्श्वे — पार्श्व, सप्तमी एकवचन — पार्श्व में, बगल में

 अभि — अव्यय — ओर, समीप, toward

 गम्यसे — √गम्, लट्, आत्मनेपद, द्वितीयपुरुष एकवचन — तुम जाते/आते हो

 त्वम् — सर्वनाम, प्रथमा एकवचन — तुम

 अबिभ्युषा — √भी, तृतीया एकवचन, विशेषणात्मक रूप — निर्भय के साथ

 वीर — वीर, सम्बोधन एकवचन — हे वीर

 सहर्षम् — सह + हर्ष, अव्यय — हर्षपूर्वक, उल्लास के साथ

 इन्द्र — इन्द्र, सम्बोधन — हे इन्द्र

 मन्दू — मन्द, द्विवचन — दोनों हर्षित/उल्लसित

 समेतौ — सम् + √इ, क्त-प्रत्यय, द्विवचन — दोनों साथ आए हुए, संयुक्त

 समानवर्चाः — समान + वर्चस्, द्विवचन-सम्बद्ध अर्थ — समान तेज वाले

 दृश्येथाम् — √दृश्, विधिलिङ्/आर्ष रूप, द्विवचन — तुम दोनों दिखाई दो/दिखो

 देवौ — देव, द्विवचन — दोनों देव

 उभौ — उभ, द्विवचन — दोनों

 प्रहृष्टौ — प्र + √हृष्, क्त-प्रत्यय, द्विवचन — अत्यन्त प्रसन्न, उल्लसित

Literal Meaning

“You come toward Indra’s side, with the fearless one, O hero, in delight. The two are exhilarated and equal in radiance; may both divine ones be seen, rejoicing.”


अनवद्यैस्ते प्रियगणैरिन्द्र

मरुद्भिरुग्रैर्दिवमभ्ययद्भिः ।

मखः सहस्वान् स्वयमर्चतीव

यजमानो घोषमुदीरयद् धि ॥

Word Forms

 अनवद्यैः — अनवद्य, तृतीया बहुवचन — निर्दोष, निष्कलंक शक्तियों के साथ

 ते — त्वम्, षष्ठी एकवचन — तुम्हारे

 प्रियगणैः — प्रिय + गण, तृतीया बहुवचन — प्रिय गणों/समूहों के साथ

 इन्द्र — इन्द्र, सम्बोधन — हे इन्द्र

 मरुद्भिः — मरुत्, तृतीया बहुवचन — मरुतों के साथ

 उग्रैः — उग्र, तृतीया बहुवचन — प्रचण्ड, शक्तिशाली

 दिवम् — द्युस्/दिव्, द्वितीया एकवचन — स्वर्ग, आकाश

 अभ्ययद्भिः — अभि + √या, वर्तमान कृदन्त, तृतीया बहुवचन — स्वर्ग की ओर जाते हुए

 मखः — मख, प्रथमा एकवचन — यज्ञ, यज्ञकर्म

 सहस्वान् — सहस्वत्, प्रथमा एकवचन — शक्तिशाली, सामर्थ्यवान

 स्वयम् — अव्यय — स्वयं

 अर्चति — √अर्च्, लट्, प्रथमपुरुष एकवचन — स्तुति करता है, प्रकाश देता है

 इव — अव्यय — जैसे, मानो

 यजमानः — यजमान, प्रथमा एकवचन — यज्ञ करने वाला, यजमान

 घोषम् — घोष, द्वितीया एकवचन — घोष, ऊँची पुकार

 उदीरयत् — उद् + √ईर्, लङ्, प्रथमपुरुष एकवचन — ऊँचा उठाया, उच्चारित किया

 हि — अव्यय — निश्चय ही

Literal Meaning

“With your beloved, faultless hosts, O Indra, the fierce Maruts hastening heavenward, the mighty sacrifice itself seems to shine forth; indeed the sacrificer raises his voice in a great cry.”


अतः परिज्मन्निह नोऽभिगच्छ

दिवो वा ज्योतिर्निचराद् विहाय ।

अस्माकमेताः प्रणयन्ति वाचः

गिरो हि सर्वाः त्वमभ्ययन्ति ॥

Word Forms

 अतः — अव्यय — यहाँ से, hence

 परिज्मन् — परिज्मन्, सम्बोधन एकवचन — हे सर्वत्र विचरण करने वाले, हे Wanderer

 इह — अव्यय — यहाँ

 नः — अस्मद्, षष्ठी/चतुर्थी बहुवचन — हमारे लिए, हमारी ओर

 अभिगच्छ — अभि + √गम्, लोट्, द्वितीयपुरुष एकवचन — आओ, हमारे पास आओ

 दिवः — द्युस्, षष्ठी/अपादान एकवचन — स्वर्ग से, आकाश से

 वा — अव्यय — अथवा

 ज्योतिः — ज्योतिस्, प्रथमा एकवचन — प्रकाश, ज्योति

 निचरात् — नि + √चर्, अपादान एकवचन — नीचे आते हुए/नीचे के प्रकाश से

 विहाय — वि + √हा, क्त्वा — छोड़कर

 अस्माकम् — अस्मद्, षष्ठी बहुवचन — हमारा

 एताः — एतद्, प्रथमा बहुवचन स्त्रीलिङ्ग — ये

 प्रणयन्ति — प्र + √नी, लट्, प्रथमपुरुष बहुवचन — आगे ले जाती हैं, निर्देशित करती हैं

 वाचः — वाच्, प्रथमा बहुवचन स्त्रीलिङ्ग — वाणियाँ, वचन

 गिरः — गिर्, प्रथमा बहुवचन स्त्रीलिङ्ग — स्तुतियाँ, गीत/हिम्न

 हि — अव्यय — निश्चय ही

 सर्वाः — सर्व, प्रथमा बहुवचन स्त्रीलिङ्ग — सभी

 त्वम् — सर्वनाम, प्रथमा एकवचन — तुम

 अभ्ययन्ति — अभि + √इ, लट्, प्रथमपुरुष बहुवचन — तुम्हारी ओर जाती हैं

Literal Meaning

“From here, O Wanderer, come to us; or come down from the light of heaven. These our words lead onward; all our songs of praise indeed yearn toward you.”


इतो वयं सातिमिन्द्र प्र यच्छ

दिवो वा भूमेरुत वा रजसः ।

महो नभसः पार्थिवस्योपरिष्टात्

त्वामेव वीरं शरणं वयं हि ॥

Word Forms

 इतः — अव्यय — यहाँ से

 वयम् — अस्मद्, प्रथमा बहुवचन — हम

 सातिम् — साति, द्वितीया एकवचन — दान, सहायता, अनुग्रह, बounty

 इन्द्र — इन्द्र, सम्बोधन — हे इन्द्र

 प्र यच्छ — प्र + √यम्/√दा, लोट्, द्वितीयपुरुष एकवचन — प्रदान करो, आगे दो

 दिवः — द्युस्, अपादान एकवचन — स्वर्ग से

 वा — अव्यय — अथवा

 भूमेः — भूमि, षष्ठी/अपादान एकवचन — पृथ्वी से, पृथ्वी का

 उत — अव्यय — और, अथवा

 वा — अव्यय — अथवा

 रजसः — रजस्, षष्ठी/अपादान एकवचन — अन्तरिक्ष से, विशाल मध्य-प्रदेश से

 महतः — महत्, षष्ठी/अपादान एकवचन — महान्, विशाल

 नभसः — नभस्, षष्ठी/अपादान एकवचन — आकाश से

 पार्थिवस्य — पार्थिव, षष्ठी एकवचन — पृथ्वी-संबंधी, पार्थिव

 उपरिष्टात् — अव्यय — ऊपर से, ऊपर स्थित से

 त्वाम् — त्वम्, द्वितीया एकवचन — तुम्हें

 एव — अव्यय — ही, केवल

 वीरम् — वीर, द्वितीया एकवचन — वीर, शक्तिशाली

 शरणम् — शरण, द्वितीया एकवचन — आश्रय, शरण

 वयम् — अस्मद्, प्रथमा बहुवचन — हम

 हि — अव्यय — निश्चय ही

Literal Meaning

“From here we seek your bounty, O Indra; or from heaven, from the earth, or from the spacious firmament. From the great sky above the earthly realm, we seek you alone, O hero, as our refuge.”

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